







रुद्रपुर। कांग्रेस की गुटबाजी खत्म होने के कांग्रेस नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं, वहीं भाजपा में गुटबाजी तो जगजाहिर है, जिससे भाजपा को भितरघात का सामना इस चुनाव में करना पड़ सकता है। कुछ भाजपाई शुरू से ही अंदरखाने विकास शर्मा का विरोध करते रहे हैं। वे नहीं चाहते कि विकास शर्मा रुद्रपुर के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरें।


दरअसल भाजपा इस समय संतरे की तरह एक दिख रही है। अंदर अलग-अलग गुट हैं। चूंकि नगर निगम पर पिछले दस साल से भाजपा का कब्जा रहा है और विधायक भी भाजपा का रहा है, लेकिन, यह बात किसी से छिपी नहीं है कि विधायकों और मेयरों के बीच 36 का आंकड़ा रहा है। इस कारण विकास कार्य प्रभावित हुए।
कांग्रेस की मजबूती का सीधा नुकसान भाजपा को होता दिख रहा है। वैसे भी पिछले दो मेयर चुनावों के परिणाम पर नजर डाले तो भाजपा की जीत का अंतर पांच हजार के आस पास रहा है, जो कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं होता।
इस समय विधायक को लेकर भी जनता की नाराजगी है। खासकर गरीब और दलित वर्ग के लोग नाराज बताए जा रहे हैं, जिसका असर भाजपा पर पड़ना निश्चित है। एनटी इनमबेंसी फैक्टर से भी भाजपा अछूती नहीं रहेगी, जिसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा।
शहर की बस्तियों में प्रीपेड बिजली के मीटर का मुद्दा खासा चर्चा में है। लोग बता रहे बिजली विभाग ने पहले विभागीय कर्मचारियों के घरों से प्रीपेड मीटर लगाने की शुरुआत कर दी है। अब हर बस्ती में अडानी के लोग मीटर लगाने पहुंचेंगे। यानि जितना चार्ज करोगे उतनी बिजली ही आप जला सकते हो। कांग्रेस इसे लेकर लोगों को जागरूक कर रही है। यह मुद्दा भी विकास शर्मा के लिए भारी पड़ सकता है।
बहरहाल, इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो भविष्य के गर्भ में निश्चित है।


