एनएच 74 प्रकरण: भूमि अधिग्रहण के प्रतिकर निर्धारण की जानकारी के बगैर एसआईटी ने दाखिल की चार्जशीट, संदेह के घेरे में एसआईटी, क्या एसआईटी के खिलाफ होगी जांच?

रुद्रपुर। एनएच 74 प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी भी सवालों के घेरे में है। एक तो एसआईटी के विवेचक ने चार्जशीट दाखिल करने के डेढ़़ साल बाद जिलाधिकारी/ एसएलएओ से पत्र लिखकर जमीन अधिग्रहण और प्रतिकर निर्धारित करने की बुनियादी जानकारी मांगी। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच में मुख्य आरोपी बनाए गए पीसीएस डीपी सिंह को शासन न सिर्फ क्लीन चिट दी, बल्कि अभियोग चलाने की अनुमति निरस्त कर दी। ऐसे में एसआईटी की भूमिका संदेह के दायरे में आना लाजमी है, क्योंकि विवेचक के पत्र पर यदि गौर किया जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि आधी अधूरी जानकारी के आधार पर चार्जशीट लगाई गई।

उल्लेखनीय है कि 10 मार्च में 2017 में थाना पंतनगर में एनएच 74 प्रकरण में पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मुकदमे की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने वर्ष 2018 में कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसमें तत्कालीन एसएलएओ डीपी सिंह पर लगे आरोप अध्यपित किए जाते हैं।

चार्जशीट में पीसीएस अफसर डीपी सिंह पर सरकार द्वारा एनएच 74 के विस्तार हेतु अधिकृत की जा रही जमीन को अकृषक दिखा कर जमीन स्वामियों को कई गुना अधिक प्रतिकर निर्धारित करने के आरोप अध्यपित किए गए। जाहिर है कि विवेचक ने पूरी विवेचना करने के बाद ही चार्जशीट दाखिल की होगी, लेकिन हैरत की बात यह है कि चार्जशीट दाखिल करने के डेढ़ साल बाद विवेचक ने डीएम/ एसएलएओ को 12 जुलाई 2019 को पत्र लिखकर जमीन अधिग्रहण के मामले में बुनियादी जानकारी मांगी। यह पत्र खुद एसआईटी की भूमिका पर सवालिया निशान लगाता है। डीएम कार्यालय से तीन सितंबर 2019 को पत्र का जवाब देते हुए सभी शासनादेशों को हवाला देकर नियम कानून की जानकारी साझा की।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि एसएलएओ के दफ्तर के पत्र से पूर्व विवेचक को प्रतिकर निर्धारण की प्रक्रिया एवं उस समय प्रचलित राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुर्वस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिनियम के प्रावधान का समुचित ज्ञान नहीं था। इसके बावजूद विवेचक ने जांच कर बिना साक्ष्यों के पीसीएस अफसर के खिलाफ शासन को गुमराह कर अभियोजन की स्वीकृति हासिल कर ली और बगैर बुनियादी जानकारी के चार्जशीट दाखिल कर दी। सूत्र बताते हैं कि मौखिक बयानों के आधार पर ही आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

मामले की शासन स्तरीय उच्चस्तरीय जांच के बाद जब डीपी सिंह को क्लीन चिट दी गई तो एसआईटी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

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