







रुद्रपुर। एनएच 74 घोटाले में मुख्य आरोपी बनाए गए पीसीएस अफसर डीपी सिंह शासन स्तर की जांच में बेदाग साबित हुए हैं। शासन ने डीपी सिंह को क्लीन चिट देते हुए पूर्व में मुकदमा चलाने की दी गई अनुमति को भी निरस्त कर दिया है। साथ ही डीपी सिंह के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई को बिना कोई दंड अधिरोपित किए खत्म कर दिया है।


उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने इस मामला की जांच करके घोटाला उजागर किया था। फिर शासन के निर्देश पर तत्कालीन एडीएम प्रताप शाह ने पंतनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। बता दें कि उस वक्त डीपी सिंह ने अपना पक्ष रखने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस महकमे की एसआईटी ने उनके तर्क दरकिनार कर दिए और उन्हें मुख्य आरोपी घोषित कर जेल भेज दिया। इसके साथ ही कई अन्य पीसीएस अफसर जेल गए थे। करीब सवा साल बाद डीपी सिंह को जमानत मिली और नियमानुसार उनकी बहाली हो गई। डोईवाला शुगर मिल के अधिशासी निदेशक के रूप में उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से सबका दिल जीता।
वर्ष 2019 में कोर्ट में आरोपपत्र पेश किया गया। एसआईटी की जांच में चार सौ करोड़ के घोटाले की बात कही गई थी। एसआईटी ने दो आईएएस अफसर और एनएचएआई के अफसरों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, जो शासन ने नहीं दी। मामले की शासन स्तर से जांच हुई। शासन की जांच में डीपी सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया और उनके खिलाफ पूर्व में दी गई अभियोजन की अनुमति को निरस्त कर दिया गया। अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने इसका आदेश भी जारी कर दिया।


