







रुद्रपुर। विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर तराई में वर्षों से बसे लोगों को उजाड़ने के विरोध में कलेक्ट्रेट में धरना दिया। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे।


बेहड़ ने कहा कि जिस तराई के लोगों ने उत्तराखंड स्थापना में विशेष योगदान दिया हो, उनके साथ हो रहा अन्याय बर्दाश्त नही किया जाएगा।
श्री बेहड़ ने कहा कि राज्य की स्थापना में विरासत में मिले हुए लोगों को अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ा जा रहा है। बेघर किया जा रहा है। इनका इतिहास 40 से 50 वर्षों पुराना है, क्या उस समय के अधिकारी दोषी नहीं है। श्री बेहड़ ने कहा की तराई के अंदर किसानों को ज़मीनें जंगलों को आबाद करने को दी गई थी,
उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व गोविंद बल्ल्भ पंत एवं मेजर संधू ने लोगों को बसया था, ज्यादातर लोग पाकिस्तान के बंटवारे के बाद यहाँ आये थे, स्वतंत्रता सेनानियों के गाँव बसाये गए। आज सरकार व उनके अधिकारी किसानों की बंजर भूमि वर्ग 4 व अन्य प्रकार की ज़मीनों को ढूंढ रहे हैं निशान लगा कर पिलर लगाए जा रहे हैं। ऐसी ज़मीने जो आजादी के बाद से किसान जोत रहे हैं उन्हें राज्य सरकार कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है।
श्री बेहड़ ने कहा की पंतगर यूनिवर्सिटी कर अंदर जो बस्तियां हैं उनको उजाड़ने की तैयारी चल रही है, जबकि यूनिवर्सिटी के अधिकांश लोग वही मजदूरी करते हैं, ज़ब यूनिवर्सिटी खुद खेती करती थी तभी से यह लोग खेती का काम करते थे, इनकी बदौलत यूनिवर्सिटी का फार्म आज तक चल रहा है, कई पीड़ियाँ हो गई काम करते हुए पंतनगर को आबाद करने में इनका अहम योगदान है, परन्तु अब इन गरीब मजदूरों को उजाड़ने कई तैयारी की जा रही है।
श्री बेहड़ ने कहा की वे मुख्यमंत्री से तराई की जनता की तरफ से मांग करते हैं कि इस अभियान को तत्काल रोका जाए और जो लोग उजाड़े गए हैं उन सबको बसाने का काम तत्काल किया जाए।स्वास्थ्य कारणों से बेहड़ भीड़ से अलग बैठे, लेकिन उनके समर्थन में पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, तमाम किसान प्रतिनिधि, कांग्रेसी धरने पर बैठे।


