जिला अस्पताल में किडनी रोगियों की कट रही जेब, तो किसी का घट रहा खून, डीजी हेल्थ का दफ्तर बना समस्या की वजह

रुद्रपुर। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते जिले के सौ से अधिक किडनी रोगियों के लिए रक्त बढ़ाने वाला ईपीओ इंजेक्शन पिछले दो महीने से नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ डाक्टर मनोज कुमार शर्मा की मानें तो डीजी हेल्थ के दफ्तर से इंजेक्शन के रेट तय नहीं हो पाने के कारण इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। सवाल यह है कि दो महीनों से रेट तय क्यों नहीं हो पा रहे हैं? कहीं इसके पीछे वजह कमीशनखोरी तो नहीं? बहरहाल, गरीब किडनी रोगियों का डायलिसिस की वजह से हीमोग्लोबिन कम होता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। किसी की जेब कट रही है तो किसी का घट रहा है खून।

उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर पर सौ से अधिक रोगियों की डायलिसिस होती है। डायलिसिस सेंटर के स्टाफ की माने तो महीने में औसतन साढ़े सात सौ डायलिसिस होती हैं। यहां डायलिसिस कराने आने वाले रोगियों को हीमोग्लोबिन के अनुसार हफ्ते एक अथवा दो इंजेक्शन खून बढ़ाने के लिए लगाए जाते हैं, ताकि रोगियों का हीमोग्लोबिन कम न हो।

पिछले कई महीनों से ईपीओ नामक इंजेक्शन को लेकर दिक्कत है। कई महीने तक ईपीओ गायब रहने के बाद कुछ दिनों इंजेक्शन मिलना शुरू हुआ, लेकिन पिछले दो महीने से फिर ईपीओ इंजेक्शन मिलना बंद हो गया। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से भी रोगियों के तीमारदार मिल चुके हैं, लेकिन कोरे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। पत्रकारों ने जब इस संबंध में सीएमएस से बात की तो उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि ईपीओ इंजेक्शन अब सीएमओ कार्यालय से मिलेंगे।

खून बढ़ाने वाला इंजेक्शन डायलिसिस रोगियों के लिए अनिवार्य है। कुछ सक्षम रोगी तो इंजेक्शन बाजार से खरीद कर लगवा लेते हैं। बाजार में इस इंजेक्शन की कीमत साढ़े तीन सौ रुपए है। यदि हफ्ते में दो इंजेक्शन लगवाए जाए तो रोगी की जेब पर महीने में 2800 रुपए का भार पड़ता है। गरीब रोगी तो डायलिसिस भी आयुष्मान कार्ड से कराते हैं वे इतना खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे में अनेक रोगियों का हीमोग्लोबिन कम हो रहा है। इस बात की पुष्टि डायलिसिस सेंटर में रोगियों की मासिक जांच रिपोर्ट से होती है।

इस संबंध में हमने सीएमओ डाक्टर मनोज कुमार शर्मा से बात की। उनका कहना था कि डीजी आफिस से ऐसे आदेश हुए थे कि अब इंजेक्शन की आपूर्ति डीजी हेल्थ के यहां से होगी। इस कारण सप्लायर ने जिला स्तर पर इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं की, हालांकि जिला स्तर से इंजेक्शन आपूर्ति के लिए आर्डर दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि डीजी के यहां से अभी रेट कांट्रेक्ट नहीं हुआ है। उन्होंने डीजी हेल्थ के दफ्तर में बात की है। यदि जिला स्तर पर इंजेक्शन की खरीद करनी होगी तो कराई जाएगी। डाक्टर शर्मा का कहना है कि उनके संज्ञान में आज ही यह समस्या आई है। वह शीघ्र इस समस्या का समाधान कराएंगे।

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