







रुद्रपुर। बकरे की मां कब तक खैर मनाती। एक न एक दिन तो दुकानें ध्वस्त होनी ही थी, लेकिन सीना तान कर व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़े रहने का दम भरने वाले खद्दरधारी पुष्कर सिंह धामी सरकार के बुलडोजर के सामने गायब रहे। अतिक्रमण तोड़ने वाले माई के लालों को ललकारने वालों को पुलिस ने नजरबंद कर दिया और कुछ नेता घरों में ही दुबके रहे। रही बात व्यापार मंडल के आह्वान की तो रुद्रपुर के व्यापारियों ने विरोध में तो क्या 150 दुकानें टूटने के गम में भी बाजार बंद नहीं किया।


लोहिया मार्केट साफ करने के लिए कई सालों से नोटिस दिए जाते रहे, लेकिन हर बार अभियान शुरू होने से पहले ही स्थगित हो जाता था। इस बार भी नोटिस दिए गए और आंदोलन शुरू हो गया। मेयर रामपाल सिंह और अन्य कई भाजपा नेताओं ने इन व्यापारियों के समर्थन में साथ खड़े रहने का वादा किया।
प्रशासन ने एक रणनीतिक ढंग से गुरुवार की रात को जिस तरह का वातावरण तैयार किया और शराब की दुकान खाली कराई, उससे व्यापारियों का हौसला टूट गया और रात में ही दुकानें खाली हो गई। शुक्रवार सुबह को पुलिस व प्रशासन की टीम ने योजनाबद्ध रूप से सारी दुकानें ध्वस्त कर दीं। भारी पुलिस बल के चलते पूरा अभियान शांतिपूर्ण ढंग से चला। इनमें कुछ दुकानें वे भी शामिल थीं जो फ्रीहोल्ड थीं, लेकिन प्रशासन ने इस फ्रीहोल्ड को नहीं माना और बुलडोजर चलवा दिया।
एनआरआई की सड़क चौड़ीकरण के बाद एक घंटे के नोटिस पर समोसा मार्केट भी उजाड़ दिया गया। रुद्रपुर के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। खैर , प्रशासन अभी और भी अतिक्रमण हटा सकता है, क्योंकि काशीपुर बाईपास के चौड़ीकरण के लिए भी धनराशि अवमुक्त हो चुकी है।
सवाल यह है कि इन दुकानों से अपना परिवार पालने वालों का अब क्या होगा? सैकड़ो परिवारों की रोजी रोटी फिलहाल छिन गई है। सरकार उनका पुनर्वासन करेगी, ऐसा कोई आसार नहीं दिख रहा है। हां नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने जरूर आएंगे। बहरहाल, जिनकी दुकानें टूटी हैं, उनके घरों में मातम सा सन्नाटा है। उन्हें जरूरत है किसी ऐसे मरहम की, जिससे उनकी रोजी रोजगार शुरू हो सके।


