हल्द्वानी के राजनीतिक घरानों की साजिश से रुद्रपुर में खत्म हो रही बेहड़ कांग्रेस, बेहड़ बोले कांग्रेस को खत्म कर सकते हैं बेहड़ को नहीं

रुद्रपुर। हल्द्वानी के दो राजनीतिक घरानों ने रुद्रपुर में तिलकराज बेहड़ को कमजोर करने की साजिश रचनी शुरू की थी, वह अब फलीभूत होती नजर आ रही है। रुद्रपुर से बेहड़ कांग्रेस खत्म होती नजर आ रही है। पार्टी की उपेक्षा और अपमान से क्षुब्ध होकर जनाधार वाले कट्टर बेहड़ समर्थकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है।

दरअसल काफी समय पहले ही इसकी पटकथा लिखी गई थी, जब हल्द्वानी के दो राजनीतिक घरानों ने तिलकराज बेहड़ के बढ़ते कद को देखते हुए उन्हें कमजोर करने की ठानी थी और बेहड़ से नाराज कांग्रेसियों पर हाथ रखना शुरू किया। हालांकि शुरूआती दौर में उन नेताओं की हैसियत ऐसी नहीं थी कि बेहड़ का खुलकर विरोध कर पाएं, इसलिए उनका गोलमेज सम्मेलन होता था। जिसमें बेहड़ के विरोधी दूसरी पार्टी के लोग भी शिरकत करते थे। पार्टी के विभीषणों और मोदी लहर के चलते ही बेहड़ रुद्रपुर विधान सभा से दो बार चुनाव हारे। अब उन्होंने किच्छा से चुनाव लड़ा और पांचवीं बार कांग्रेस के विधायक चुने गए। बावजूद इसके उनकी राजनीति का केंद्र रुद्रपुर ही रहा।

हल्द्वानी के एक राजनीतिक घराने का वरदहस्त प्राप्त नेता को कांग्रेस का जिलाध्यक्ष बना दिया गया, जिसमें बेहड़ की राय तक नहीं ली गई। इसके बाद बेहड़ की राय लिए बगैर महानगर अध्यक्ष पद पर सीपी शर्मा की ताजपोशी कर दी गई। पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ ने इस बार विरोध भी जताया, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

लोकसभा चुनाव से पहले से ही रुद्रपुर में दो कांग्रेस दिखने लगी थीं, एक बेहड़ कांग्रेस और दूसरी गावा कांग्रेस। धीरे धीरे बेहड़ समर्थक कांग्रेसी अपनी उपेक्षा से त्रस्त होकर भाजपा का दामन थामने लगे। अनेक कांग्रेसी पार्षद और पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष और पूर्व महामंत्री तक ने कांग्रेस से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसमें वे जनाधार वाले नेता भी शामिल हैं, जिनकी अपने इलाके में पकड़ थी। इससे कांग्रेस तो कमजोर हो ही रही है। इससे लोकसभा चुनाव में भाजपा मजबूत हो रही है, वहीं इसका गहरा प्रभाव आगामी निकाय चुनाव पर भी पड़ेगा।

इस संबंध में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ का कहना है कि उन्हें चुनाव हरवाया गया, लेकिन वह फिर चुनाव जीतकर राजनीति में जिंदा हैं। उन्हें राजनीति में निपटाने की कोशिश की गई, लेकिन सफल कोई नहीं हो सकता। जनता का प्यार उनके साथ है। बेहड़ समर्थक लोगों के कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी के व्यक्तिगत या राजनीतिक कारण हो सकते हैं, लेकिन वे तिलकराज बेहड़ को पसंद करते हैं। कहा रुद्रपुर में आज भी उनके चाहने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं। वे किसी साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। कहा कि रुद्रपुर में कांग्रेस को खत्म कर सकते हैं, लेकिन बेहड़ को खत्म नहीं कर सकते। कांग्रेस संगठन को यह जवाब देना चाहिए कि ऐसे हालात क्यों उत्पन्न हुए हैं।

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