







रामलला की नगरी अयोध्या पहुंचे साइकिल यात्री खरबंदा एवं पैदल यात्री गाबा, श्री हनुमानगढ़ी के महंत जी ने किया स्वागत


रुद्रपुर। यहां से अयोध्या तक 475 किलोमीटर साइकिल यात्रा कर रहे समाजसेवी जसविंदर सिंह खरबंदा व उनके पुत्र एवं पैदल यात्रा पर निकले समाजसेवी सुशील गाबा विगत रात्रि अयोध्याजी पहुंच गए। सुप्रसिद्ध पौराणिक ऐतिहासिक श्री हनुमान गढ़ी पीठ के महंत डॉक्टर देवेशाचार्य जी महाराज ने तीनों समाजसेवियों को रामनाम का पटका पहनाकर उत्साहवर्धन कर आशीर्वाद दिया।
ज्ञातव्य है कि अयोध्या की सरयू नदी के दाहिने तट पर ऊंचे टीले पर स्थित हनुमानगढ़ी सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। अयोध्या में राम जन्मभूमि के दर्शन करने से पूर्व यहां पर हनुमानजी के ही दर्शन करना होते हैं। माना जाता है कि लंका विजय करने के बाद हनुमान यहां एक गुफा में रहते थे और राम जन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे। इसी कारण इसका नाम हनुमानगढ़ या हनुमान कोट पड़ा। इसे ही हनुमानजी का घर भी कहा गया।
महंत डॉक्टर देवेशाचार्य जी महाराज ने रुद्रपुर उत्तराखंड की धरती से पधारे तीनों यात्रियों की हिम्मत की प्रशंसा करते हुए कहा कि निश्चित रूप से प्रभु राम के अनन्य भक्त भी इतनी हिम्मत कर पाते हैं। स्वागत कार्यक्रम के बाद तीनों राम भक्तों के रात्रि विश्राम एवं भोजन की व्यवस्था भी श्री हनुमानगढ़ी में की गई।
श्री गाबा और खरबंदा कल राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण के साक्षी बनेंगे।


