







रुद्रपुर। महानगर के प्रीत बिहार इलाके में एक शिशु की मेडिस्टार अस्पताल में मौत हो गई। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह अस्पताल एक ऐसा शख्स चला रहा था, जिसके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है, लेकिन उसने अस्पताल में आईसीयू तक बना रखा था। समय रहते चिकित्सा विभाग मौन रहा। पुलिस ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया है। सूचना पर पहुंचे भाजपा विधायक शिव अरोरा के समक्ष जब उपचार कर रहे कथित डाक्टर यासीन पासा ने कोई डिग्री न होने की बात स्वीकारी तो विधायक ने अस्पताल को सील करने और शिशु की हत्या का मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। हालांकि इतना बड़ा अस्पताल बगैर सीएमओ दफ्तर की शह पर संचालित हो रहा हो, यह गले से नहीं उतरता।


प्रीत बिहार निवासी नीरज पाल पुत्र महेश पाल को पहला पुत्र हुआ, जो सात दिन का था। अभी उसका नामकरण भी नहीं हुआ था कि शिशु को श्वास लेने में तकलीफ हुई। परिजन उसे मेडिस्टार हास्पिटल ले गए, जहां कथित डाक्टर यासीन पासा ने उसे एनआईसीयू में भर्ती कर लिया। उपचार के दौरान शिशु ने दम तोड़ दिया। जिस पर परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शिशु के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
उधर, वार्ड 25 के पार्षद सुशील यादव की सूचना पर मौके पर पहुंचे भाजपा विधायक शिव अरोरा ने मेडिस्टार हास्पिटल का निरीक्षण किया। विधायक ने पत्रकारों को बताया कि डाक्टर पासा से जब उन्होंने पूछा कि उसके पास डिग्री क्या है तो उसने कोई डिग्री न होने की बात स्वीकारी। कहा कि इस प्रकार तो यह हत्या का केस बनता है। उन्होंने सीएमओ और पुलिस महकमे को अस्पताल सीज करने के निर्देश दिए हैं। परिजनों की तहरीर पर हत्या का मुकदमा लिखा जाएगा और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
यहां बड़ा सवाल यह है कि एक साल से यह मेडिस्टार हास्पिटल चल रहा था, जिसका कोई पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग में नहीं था। अस्पताल में ऐसे इंतजाम थे, जिसके लिए सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर चाहिए थे, फिर भी समय रहते स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अस्पताल को चलने दिया। क्या इस घटना के लिए विभागीय अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं?


