पांच हजार के चैक पर तीन हजार की रिश्वत! पूर्व विधायक ने जीजा साले पर कसा तंज, विधायक ने इसे साजिश बताया

रुद्रपुर। मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाले पांच हजार का चैक देने के एवज में एक नेता द्वारा तीन हजार की घूस मांगने के मामले में राजनीति गरमा गई है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने जहां जीजा साले पर तंज कसते हुए गंभीर आरोप लगाए और एसएसपी की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए, वहीं विधायक शिव अरोरा ने अपने कार्यालय पर प्रेस वार्ता कर चैक प्रकरण पर स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी आर्थिक सहायता का चैक बांटने की तहसील स्तर से बहुत पारदर्शी प्रकिया की जाती है। चैक प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बकायदा रजिस्टर में हस्ताक्षर व सभी जरूरी प्रकिया के बाद चैक सौंपा जाता है। ऐसे में पूर्व जनप्रतिनिधि द्वारा चैक पाने वाले के साथ की गई प्रेसवार्ता में लगाये गये आरोप निराधार हैं। और उस व्यक्ति द्वारा चैक न मिलने पर न तो विधायक कार्यालय सम्पर्क किया गया और न ही तहसील स्तर पर चैक प्राप्त न होने की जानकारी दी गयी।
वही विधायक बोले मुख्यमंत्री राहत कोष से आज तक हजारों चैक बाटे जा चुके है आज तक ऐसी घटना सामने नहीं आयी है यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है और इसकी जांच होने चाहिए साथ ही रिकॉडिंग मे जो भी लोग बात कर रहे हैं उसकी जांच हो।

गौरतलब है ठुकराल ने कहा कि जीजा साले की सरकार मिल कर लूट रही है। कहा कि उनके कार्यकाल में हजारों चैक वितरित किए गए, मगर कहीं से कोई शिकायत नहीं आई। जावेद नाम का शख्स लाभार्थी से पांच हजार के चैक के एवज में तीन हजार रुपए मांग रहा है, जो एक जनप्रतिनिधि का करीबी है। कहा कि एसएसपी सत्ता के दबाव में कार्य कर रहे हैं। स्क्रैप चोरी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसमें अच्छी-खासी रकम का बंदरबांट हुआ। ऊधमसिंहनगर में सर्वाधिक अपराध हो रहे हैं। उन्होंने अनेक उदाहरण दिए और विधायक शिव अरोरा पर निशाना साधा।

उधर विधायक शिव अरोरा ने कहा कि किसके इशारे पर चैक पाने वाले ने यह कार्य किया यह जांच होने पर साफ होगा, ओर जो चैक न मिलने का आरोप लगा रहा है आखिर उसको तहसील से चैक बिना कोई जटिलता के मिल भी जाता। यह सोचने की बात है। विधायक बोले उनके कार्यकाल मे सभी कार्य बहुत पारदर्शिता से होते आ रहे है और पूर्व जनप्रतिनिधि अपनी दस साल की नाकामी छुपाने के लिये आये दिन निराधार आरोप लगाते रहते हैं जिनका कोई आधार नहीं होता।
विधायक बोले उनके द्वारा किये दो साल के कार्यकाल मे विकास कार्य से वह बोखला गये है ओर उनके पास अपने कार्याकाल की कोई उपलब्धि गिनाने को कुछ नहीं है।

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