







अतिक्रमण, कारण और समाधान विषय पर वसुधा टाइम्स ने प्रबुद्ध वर्ग के समाजसेवी जेबी सिंह के विचारों की श्रृंखला प्रकाशित की। जेबी सिंह की कलम से यह इस श्रृंखला की अंतिम कड़ी है। हमें उम्मीद है कि उनके विचारों से शासन व प्रशासन के अधिकारी कुछ न कुछ ग्रहण जरूर करेंगे और अतिक्रमण को नहीं पनपने देंगे।


क्रमशः 5••
1 जिम्मेदार एजेंसियों पहले दिन से ही अतिक्रमण पर कड़ा रुख अख्तियार करें। यह नही कि कोई कहीं भी ठेला खोखा लगा ले और देखा देखी वहाँ एक बाजार विकसित हो जाए।
2 शहरों में व्यस्त स्थानों के निकट स्थान चयनित कर स्वरोजगार करने वालों को आवंटित की जाए, वहाँ अच्छी जन सुविधाएँ भी विकसित की जाएं ।
3 ऐसे आवंटित स्थानों पर क्रय-विक्रय और स्थानांतरण पर सौ प्रतिशत प्रतिबंध होना चाहिए।
4 यह सुनिश्चित किया जाए यदि आवंटी इसमें निर्धारित समय पर कोई रोजगार नहीं करता तो आवंटन स्वतः निरस्त माना लिया जाए।
इन कदमों से भू-माफिया या दलालों का प्रवेश रुक जाएगा।
लोगों को एक भ्रम रहता है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ही कारोबार चल सकता है परन्तु ऐसा नहीं है हम बताते हैं क्यों!जब भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर कुछ मिलेगा ही नहीं तो ग्राहक स्वयं उन विकसित स्थानों पर पहुँचेगा।
ऐसे दुकानदार या ठेले वाले कम मार्जिन पर अपना व्यवसाय करते हैं क्योंकि उनके ओवरहेड अपेक्षाकृत कम होते हैं, जिसके कारण निम्न या मध्य आय वर्ग का ग्राहक ऐसे जगहों पर स्वतः पहुँचता है। कई शहरों में हमने ऐसे बाजारों को विकसित और प्रसिद्ध होते देखा है, जो ग्राहकों से पटे रहते हैं। ऐसे स्थानों को लगातार विकसित करते रहना होगा, क्योंकि जनसंख्या का दबाव और बेरोजगारी का दुष्परिणाम अभी कई दशक हमें झेलना है ।
इस प्रयास से अतिक्रमण जैसी गम्भीर समस्या से जहाँ निजात मिलेगी वहीं जमे जमाए व्यवसाय और उजड़ने जैसी पीड़ा से भी बच जाएंगे।
आप लोग भी इस पर कुछ सुझाव अवश्य साझा करें।


