







रुद्रपुर। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि तराई के संस्थापक पंडित गोविंद बल्ल्भ पंत और मेजर सिंधू थे। पंडित राम सुमेर शुक्ल सिर्फ उस कमेटी के सदस्य थे। पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने उन्हें तराई का संस्थापक बताकर एनडी तिवारी से मूर्ति स्थापित कराई और हरीश रावत को ब्लैकमेल करके मेडिकल कालेज का नाम अपने पिता के नाम करा लिया। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने किच्छा कालेज का नाम अंबेडकर के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा तो राजेश शुक्ला को मिर्च क्यों लग गई?


विधायक अपने आवास पर पत्रकार वार्ता कर रहे थे। शुक्ला के आरोप पर पलटवार करते हुए बेहड़ ने सवाल दागा कि पुत्र मोह किसे नहीं होता। शुक्ला का भतीजा भी उनके पुत्र के समान ही है। उसके कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं। वह व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाना चाहते हैं, लेकिन यदि उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाए जाएंगे तो बात बहुत दूर तक जाएगी। कहा कि शुक्ला रक्षा समिति का ही हिसाब किताब दे दें।
कहा कि राजेश शुक्ला खुद दिवंगत मुलायम सिंह यादव के चेले रहे हैं। अखिलेश यादव यूपी के सीएम बने तो क्या वह पुत्र मोह नहीं था। उनके बेटे पर तो कोई आरोप नहीं है, जबकि राजेश शुक्ला के भतीजे के बारे में पूरा क्षेत्र जानता है।
बेहड़ ने कहा कि शुक्ला को अपने घर की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने अपने आवास पर कार्यक्रम किया तो पार्टी के दोनों जिलाध्यक्ष और कोई विधायक नहीं पहुंचा। उनमें सामर्थ्य हो तो वे अजय भट्ट का टिकट कटवाकर चुनाव लड़े या देवरिया (यूपी) से चुनाव लड़े। वे सीपी शर्मा को लेकर क्या उलाहना देते हैं। राजनीति में फैसले होते रहते हैं। वे विकास कराने के लिए मुख्यमंत्री से मिलते हैं तो गलत क्या है? उन्होंने कहा कि किन्नू शुक्ला के पिता भी महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके नाम पर भी स्कूल होना चाहिए था। कहा कि राजेश शुक्ला उनके सामने तीन चुनाव हार चुके हैं और चौथा चुनाव हारने को तैयार रहें।


