इशारों ही इशारों में बड़ा संकेत दे गए जिले के कद्दावर नेता

रुद्रपुर। एक कार्यक्रम में इशारे ही इशारों में जिले के राजनीतिक दिग्गजों में हुई वार्तालाप राजनीतिक बदलाव का संकेत दे गई। भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय ने काफी खुलकर पूर्व मंत्री व कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ को भाजपा में शामिल होने का न्यौता अपने अंदाज में दिया।

एक होटल में खबर पड़ताल पोर्टल के दो वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा और कांग्रेस के नेता एकत्र हुए थे। अपने संबोधन में विधायक अरविंद पांडेय ने तिलकराज बेहड़ को अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है। कहा कि वह तो कहते हैं कि बेहड़ जी बुजुर्ग की हैसियत से आकर उन्हें संभाल लें। मतलब साफ था कि बेहड़ घर वापसी कर लें। बता दें कि बेहड़ ने भाजपा छोड़कर तराई में कांग्रेस का परचम फहराया था।

इससे पूर्व बेहड़ ने कहा कि एक कार्यक्रम में भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट ने अपने संबोधन में दो बार इंडिया बोल दिया तो उन्होंने कह दिया कि इंडिया बोलोगे तो टिकट कट जाएगा। बाद में विधायक शिव अरोरा ने यह बात उन तक पहुंचा दी। उन्होंने आजाद पंछी कह कर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की चुटकी ली। विधायक शिव अरोरा ने अपने संबोधन में कहा कि सियासत में कुछ लोग व्यक्तिगत दुश्मनी पर उतारू हो जाते हैं, जबकि विचारों की लड़ाई होनी चाहिए।

इस कार्यक्रम में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष सीपी शर्मा अपनी टीम के साथ मौजूद थे। बेहड़ ने अपनी पार्टी के इन नेताओं को कोई तवज्जो नहीं दी। कांग्रेस विधायक बेहड़ और इन नेताओं के बीच अभिवादन तक नहीं हुआ। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी कांग्रेस नेताओं के पाले में दिखे और उनका कांग्रेस नेताओं ने ( बेहड़ को छोड़कर) गर्मजोशी से स्वागत किया।

यहां बता दें कि किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ इन दिनों कांग्रेस संगठन से नाराज चल रहे हैं। एक अन्य कार्यक्रम में बेहड़ ने कि जो लोग उन्हें गाली देते थे, संगठन ने उन्हें जिले का सबसे बड़ा पद दे दिया। यह कार्यक्रम मुस्लिम बस्ती में था। वहां बेहड़ ने कहा कि जो नेता अपने दादा के जमाने की बात करते हैं, जाकर पूछो उनसे कि उन्होंने कब रोजा इफ्तार कराया? यह एसी में बैठकर राजनीति करते हैं। जहां काकटिल पार्टी होती है उन शादियों में शिरकत करते हैं। किसी गरीब के सुख दुख में नहीं जाते। ऐसे कोई पार्टी मजबूत नहीं होती। इस दौरान उन्होंने खूब मन का गुबार निकाला। महानगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर वह पहले ही सवाल उठा चुके हैं।

उन्होंने दीपावली के बाद लोकसभा चुनाव लड़ने के संबंध में फैसला लेने की बात कही। बहरहाल, राजनीतिक वार्तालाप कुछ तो संकेत दे गया।

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